Thursday, April 18, 2019

ईवीएम 'हैकिंग' करने वाले हरि प्रसाद जिनसे चुनाव आयोग नहीं मिलना चाहता

घनश्याम शाह ने कहा, "गुजरात में घांची समाज राज्य के सभी हिस्सों में फैला हुआ है. इसका एक हिस्सा मोढेरा सूर्य मंदिर के आस-पास के इलाकों में है जिसे मोढ घांची कहते हैं."
पर सवाल यह है कि अगर मोदी की जाति ओबीसी सूची में आती थी तो फिर सरकार ने 2002 में यह परिपत्र क्यों जारी किया?
अपना नाम दिए जाने से इनकार करते हुए गुजरात सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने बीबीसी हिंदी को बताया था, "समस्या यह थी कि जब घांची समाज को ओबीसी सूची में डाला तब उसकी सभी उपजाति को भी उसमें शामिल कर देना चाहिए था. पर ऐसा नही हुआ. इसलिए गुजारत सरकार ने एक नया परिपत्र जारी करके मोढ घांची का उसमें शामिल कर लिया."
हलांकि जब उनसे यह पूछा गया कि क्या यह मोदी के कहने से हुआ तो उन्होने इस बारे में 'जानकारी नहीं है' कहकर बात समाप्त कर दी.
हरि कृष्ण प्रसाद वेमुरु आंध्र प्रदेश सरकार में तकनीकी सलाहकार हैं. इसके अलावा वो नेट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं.
साल 2010 में हरि प्रसाद तब सुर्खि़यों में आए जब उन पर कथित तौर पर ईवीएम से छेड़छाड़ करने और ईवीएम चुराने के आरोप लगे. अब वह तेलुगु देशम पार्टी से जुड़े हैं.
अब उनके नाम के साथ तेलुगु देशम पार्टी ने भारत के चुनाव आयोग को प्रस्तावित टीम का नाम सौंपा तो चुनाव आयोग ने उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई, इसे लेकर वह एक बार फिर सुर्खि़यों में है.
हरि प्रसाद कहते हैं, ''किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से छेड़छाड़ की जा सकती है. इसके लिए एक रसीद होनी चाहिए. तभी हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनका दुरुपयोग नहीं हुआ है.''
हरि प्रसाद 2009 से ईवीएम के मुद्दों पर सक्रिय हैं. वह इलेक्शन वॉच के संयोजक वीवी.राव को तकनीकी सहायता भी प्रदान कर चुके हैं. राव ने ईवीएम पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख़ किया है.
चुनाव आयोग ने सितंबर, 2009 में अपने सामने उन्हें ईवीएम हैक करने के लिए आमंत्रित किया था. मगर चुनाव आयोग ने हरि प्रसाद की टीम को अपना काम पूरा करने से पहले रोक दिया.
इसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि उनकी टीम ईवीएम हैक नहीं कर पायी.
हरि प्रसाद का कहना था कि आयोग ने उन्हें काम पूरा नहीं करने दिया. उन्होंने इस पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्डिंग जारी कराने की भी अपील की थी.
वी.वी राव कहते हैं, "हमारे काम में बाधा डालने के लिए, भारत का चुनाव आयोग खोखली दलील लेकर आया था कि ईवीएम खोलने से ईसीआईएल के पेटेंट का उल्लंघन होगा."
साल 2010 में महाराष्ट्र से ईवीएम चुराने के आरोप में हरि प्रसाद को गिरफ्तार किया गया था.
हरि प्रसाद 29 अप्रैल 2010 को एक तेलुगू चैनल पर लाइव ये दिखा रहे थे कि कैसे एक ईवीएम को हैक किया जा सकता है.
जिस ईवीएम पर हरि प्रसाद ये डेमो दिखा रहे थे उसका इस्तेमाल महाराष्ट्र चुनाव में किया गया था.
12 मई, 2010 को महाराष्ट्र के राज्य चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र पुलिस से इसकी शिकायत की जिसके बाद उनके खिलाफ़ मामला दर्ज किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
इस पूरी घटना को राव याद करते हुए कहते हैं, ''2009 में हमने ईवीएम से संबंधित 50 सवालों के साथ चुनाव आयोग से संपर्क किया था. उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर हमने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया. ईवीएम पर अपनी पहली याचिका के दौरान हरि प्रसाद ने हमें तकनीकी सहायता मुहैया करायी.''